देवभूमि की दिव्यता में खोए नवजोत सिंह सिद्धू, सुरकंडा देवी मंदिर में की गहन साधना

टिहरी : देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री सुरकंडा देवी मंदिर में हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर, राजनेता और प्रसिद्ध वक्ता नवजोत सिंह सिद्धू ने चार दिनों तक ध्यान-साधना और पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

सिद्धू 30 मई को कनाताल पहुंचे और एक निजी होटल में ठहरे। इसके बाद 31 मई से 3 जून तक वे प्रतिदिन शाम के समय श्री सुरकंडा धाम पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग आधे घंटे तक पूजा-अर्चना की और करीब तीन घंटे तक गहन ध्यान-साधना में समय बिताया।

अपने अनुभव साझा करते हुए सिद्धू ने कहा कि पूरा उत्तराखंड देवभूमि है, लेकिन श्री सुरकंडा धाम में एक विशेष प्रकार की दिव्य ऊर्जा विद्यमान है। उन्होंने इसे “असीम ऊर्जा का स्रोत” बताते हुए कहा कि यहां का आध्यात्मिक वातावरण मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक शक्ति प्रदान करता है।

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दिलचस्प बात यह रही कि उनका प्रारंभिक कार्यक्रम केवल तीन दिनों का था, लेकिन मंदिर और वहां के आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने अपना प्रवास एक दिन और बढ़ा दिया।

एक आम श्रद्धालु की तरह पहुंचे सिद्धू

सेलिब्रिटी होने के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू मंदिर में किसी विशेष व्यवस्था या सुरक्षा घेरे के साथ नहीं पहुंचे। उन्होंने एक सामान्य भक्त की तरह मंदिर में दर्शन और साधना की। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें और सेल्फी भी लीं।

मंदिर समिति से साझा किए सुझाव

मंदिर समिति के प्रबंधक रघुभाई जड़धारी के अनुसार, सिद्धू ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ समय बिताया और मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मंदिर की आरती व्यवस्था, पैदल मार्ग की साज-सज्जा तथा कद्दूखाल पार्किंग क्षेत्र के विकास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

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साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि मंदिर समिति को किसी भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी, तो वे हर संभव सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार वे अपने परिवार के साथ श्री सुरकंडा धाम के दर्शन के लिए अवश्य आएंगे।

आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नवजोत सिंह सिद्धू जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व का श्री सुरकंडा धाम में ध्यान-साधना के लिए आना न केवल मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि उत्तराखंड के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई पहचान प्रदान करता है। उनके अनुभव और सोशल मीडिया पर साझा किए गए विचार देशभर के श्रद्धालुओं को इस पवित्र धाम की ओर आकर्षित कर सकते हैं।

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